बिहार में साइबर ठगी का नया तरीका: लापता बच्चे की तस्वीर से परिजनों से वसूली, 50 हजार की ठगी

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ऑनलाइन ठगों ने एक बच्चे के लापता होने की सूचना का फायदा उठाकर उसके परिवार से हजारों रुपये ऐंठ लिए। खास बात यह है कि ठगी उस समय की गई जब बच्चा ठगों के पास था ही नहीं।

यह घटना मोतिहारी शहर से जुड़ी है, जहां एक 14 वर्षीय किशोर के अचानक घर से गायब होने के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की थी। इसी दौरान साइबर ठगों ने सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट और सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल कर परिवार को जाल में फंसा लिया।

सोशल मीडिया पोस्ट बनी ठगों का हथियार

जानकारी के अनुसार, बच्चा 20 दिसंबर की शाम खेलने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। अगली सुबह परिजनों ने थाने में सूचना दी और बच्चे की तस्वीर के साथ फेसबुक पर गुमशुदगी की पोस्ट साझा की। इसी पोस्ट के बाद परिवार को कई अनजान कॉल आने लगे।

इनमें से कुछ कॉल विदेशी कोड वाले नंबरों से थे। पुलिस के मुताबिक, इन्हीं कॉल्स के जरिए साइबर ठगों ने परिवार से संपर्क साधा और बच्चे के अपहरण का डर दिखाया।

डर और दबाव बनाकर मांगी गई रकम

परिजनों का कहना है कि ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को अपहरणकर्ता बताया और एक बच्चे की झलक दिखाकर जान से नुकसान की धमकी दी। घबराए माता-पिता को लगा कि दिखाया गया बच्चा उन्हीं का बेटा है। डर के माहौल में परिवार ने 50 हजार रुपये ठगों के बताए गए खाते में भेज दिए।

हालांकि, रकम देने के बाद भी बच्चा वापस नहीं आया। इसके बाद ठगों ने दोबारा पैसे की मांग की, जिससे परिवार को शक हुआ और उन्होंने पूरी बात पुलिस को बताई।

मुजफ्फरपुर में सुरक्षित मिला बच्चा

इस पूरे मामले में सबसे राहत की बात यह रही कि बच्चा किसी अपराध का शिकार नहीं हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह मां की डांट के डर से खुद ही घर से निकल गया था। भटकते हुए वह मुजफ्फरपुर पहुंच गया, जहां एक ठेले वाले की मदद से उसने अपनी मां से संपर्क किया।

सूचना मिलते ही पुलिस ने बच्चे को परिवार से मिलवाया।

पुलिस कर रही है साइबर ठगों की तलाश

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहले इस मामले में अपहरण की धारा में केस दर्ज किया गया था, लेकिन अब इसे साइबर ठगी के मामले में बदला जाएगा। जिन खातों में पैसे भेजे गए हैं, वे बिहार के बाहर के बताए जा रहे हैं और उनकी जांच जारी है।

परिवार का कहना है कि बच्चे की सकुशल वापसी से राहत जरूर मिली है, लेकिन जो लोग उनके दर्द का फायदा उठाकर ठगी कर गए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो।

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